गोली मार टरक को यार।
अब तो रात होने को है
ठंड भी कैसी है
कमबखत
वो सामने देखते हो लेबर कैम्प
सोलर जल रहा जहाँ
मेटनी के तम्बू में
चल , दो घूंट लगाते हैं
जीरे के तड़के वाली
फ्राईड मोमो के साथ
गरमा जाएगा जिसम
गला भी हो जाएगा तर
दो हाथ मांगपत्ता हो जाए
पड़े रहेंगें रात भर
सुबह तक पटा लेगें किसी उस्ताद को हज़ार पाँच सौ में
खुश हो जाएगी घरवाली।
Wednesday, October 9, 2013
आलू का सीज़न / अजेय
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