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Wednesday, October 16, 2013

मैं / अंजना बख्शी

मैं क़ैद हूँ
औरत की परिभाषा में

मैं क़ैद हूँ
अपने ही बनाए रिश्तों और
संबंधों के मकड़जाल में।

मैं क़ैद हूँ
कोख की बंद क्यारी में।

मैं क़ैद हूँ
माँ के अपनत्व में।

मैं क़ैद हूँ
पति के निजत्व में

और
मैं क़ैद हूँ
अपने ही स्वामित्व में।

मैं क़ैद हूँ
अपने ही में।

अंजना बख्शी

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