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Friday, October 4, 2013

ख़ुदारा! न दो बदगुमानी का मौका / आरज़ू लखनवी

खुदारा ! न दो बदगुमानी का मौक़ा।
कहलवा के औरों से पैग़ाम अपना॥

हविसकार आशिक भी ऐसा है जैसे--
वह बन्दा कि रख ले ख़ुदा नाम अपना॥

आरज़ू लखनवी

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