खुदारा ! न दो बदगुमानी का मौक़ा। कहलवा के औरों से पैग़ाम अपना॥ हविसकार आशिक भी ऐसा है जैसे-- वह बन्दा कि रख ले ख़ुदा नाम अपना॥
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