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Wednesday, October 23, 2013

मीर / आलोक धन्वा


मीर पर बातें करो
तो वे बातें भी उतनी ही अच्छी लगती हैं
जितने मीर

और तुम्हारा वह कहना सब
दीवानगी की सादगी में
दिल-दिल करना
दुहराना दिल के बारे में
ज़ोर देकर कहना अपने दिल के बारे में कि
जनाब यह वही दिल है
जो मीर की गली से हो आया है।


(1996)

आलोक धन्वा

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